गुरुवार, 3 अप्रैल 2014

चुनाव आ गया



लो चुनाव आ गया

तरह-तरह के रंग सजे
नए बने गाने
आकाश ताक रहा
जाने अनजाने
रेडुआ पर, टीवी पर
प्रचार की बहार है
लोक-लुभाने नारों की 
बयार है

खाने के पैकेट हैं
पूड़ी है सब्जी है
एक मिठाई है
गजब का मौसम है
सारे मेरे भाई हैं
सबको मुझसे प्यार है
गले लगे दोस्तों की तरह
पीठ थपथपाते हैं
मुस्कुराते हैं
हाथ जोड़ते हैं
कान में फुसफुसाते हैं

सब अच्छे हैं
सब सच्चे हैं
सब पवित्र हैं
सब सेवक हैं
सबकी निगाह में प्रेम है
सबकी बांहे खुली हुई हैं

मुद्दतों भूखा रहा हूं मैं
कभी अधपेट
कभी पानी पीकर गुजारा किया है
अभी कुछ दिनों से खुश हूं
क्योंकि
कई महीनो बाद
आज पेटभर खाया है

चुनाव आया है।

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