रविवार, 12 अप्रैल 2026

भव्य स्वागत - भयानक स्वागत






 लीजिए आज आपके लिए एक आश्चर्यजनक कहानी लेकर आया हूं। एक देश में एक साधुवेशधारी राक्षस रहता था। साधुवेशधारी उस राक्षस के बहुत सारे राजनेता मित्र होते थे। वो साधुवेशधारी उन राजनेताओं के साथ नाचता गाता था, और अपने कुकर्मों को अंजाम देता था। आम जनता उस साधुवेशधारी दुरात्मा की लच्छेदार बातों पर मंत्रमुग्ध थी, और उसे देवता मानती थी। अपने आयोजनों के द्वारा उस साधुवेशधारी ने अपने प्रपंच का बहुत लंबा जाल बिछा लिया था। तमाम राजनेताओं की सोहबत और उनकी सत्ता उसे तमाम सुविधाएं दिलवाती रहती थीं। पुलिस वाले उसे सुरक्षा देते थे, उसके आयोजनों को वो सब सुविधाएं मिलती थीं, जो अन्य आयोजनों को नहीं मिलती। पुलिस वाले उसके कदमों में बिछे-बिछे जाते थे। आश्चर्यजनक बात ये थी कि सत्ता जो हर व्यक्ति पर ई डी का छापा पड़वाती थी, उसने इस साधुवेशधारी के खिलाफ कभी किसी भी तरह की कोई जांच नहीं चलाई थी। आखिर सत्ता के शीर्ष पर बैठने वाले व्यक्ति का इस साधुवेशधारी के साथ साझा था, जो इसके साथ नाचता था। 




अपने धंधे के चक्कर में वो इतना शक्तिशाली बन चुका था कि वो पुलिस जिसे जनता की रक्षा करना थी, वो उस साधुवेशधारी राक्षस की ही रक्षा करती थी, उसके लिए काम करने को तैयार थी। ये आपके देश की बात नहीं है, अगर किसी को इस कहानी में किसी के साथ कोई समानता नज़र आती है, तो ये उसकी अपनी कल्पनाशक्ति का कमाल होगा। साधुवेशधारी ने अपने इस धंधे का साम्राज्य पूरे देश भर में फैला लिया था। देश के हर राज्य में उसके विशाल आश्रम थे, जहां वो मासूम महिलाओं का शिकार करता था। देश के अलावा उसने विदेशों में भी अपने कुकर्मांे का जाल फैलाया हुआ था, और वो देश-विदेश से करोड़ों का चंदा लेता था। उसका प्रभावक्षेत्र इतना ज्यादा था कि उसकी शिकार बच्चियों और उनके परिवार वालों की हिम्मत तक नहीं होती थी कि उस साधुवेशधारी के खिलाफ वो कोई आवाज़ तक उठा सके। वे चुपचाप अपनी मूर्खता पर आसूं बहाते थे, और अतंतः अपने भाग्य को रोते थे। लेकिन अंततः एक बच्ची ने हिम्मत की, उसके माता-पिता ने पुलिस में रिपोर्ट की, 16 साल की ये लड़की अपने माता-पिता के कहने पर उस साधुवेशधारी के पास गई, जिसने उस बच्ची के साथ वहशियाना हरकतें कीं और फिर उसे जान से मारने की धमकी भी दी। साथ में ये धमकी भी दी कि यदि उसने इस बारे में किसी को भी बताया तो उसके पूरे परिवार को खत्म कर दिया जाएगा। लेकिन बात सिर्फ यहां खत्म नहीं होती, इसके अलावा एक महिला और उसकी छोटी बहन ने भी हिम्मत करके उस साधुवेशधारी और उसके बेटे के खिलाफ शिकायत लिखवाई। 

दोनो ही मामलों में उन बच्चियों को सुरक्षा प्रदान करने की जगह, पूरी सत्ता जिसमें उस साधुवेशधारी के चेले बैठे हुए थे, और खुद भी इसी तरह की वासना से लिप्त थे, पूरी व्यवस्था ने और खुद इस साधुवेशधारी के अंधभक्तों ने भी इन बच्चियों का और उनके परिवार और रिश्तेदारों का जीना हराम कर दिया। उन्हें लगातार धमकियां मिलने लगीं, इन बच्चियों के पक्ष में जिसने भी इस साधुवेशधारी के खिलाफ गवाही देने की कोशिश की उसकी ही जान पर बन आई। कई लोग सिर्फ इसलिए मारे गए, क्योंकि वे उन बच्चियों के पक्ष में थे, और इस साधुवेशधारी की सत्ता के सबसे उंचे पद तक पहुंच थी। उसके खिलाफ जिन गवाहों ने गवाहियां दीं, उनमें से नौ गवाहों पर जानलेवा हमला किया गया, जिनमें से तीन की हत्या कर दी गई, और पुलिस इन मामलों की जांच कर रही है। 

उसके कुकर्मों की इतनी लंबी लिस्ट हो गई थी कि पाप का घड़ा भर गया था। आखिरकार उसे पुलिस ने गिरफ्तार किया, और न्यायालय ने उसे उसके कुकर्माें की सज़ा सुनाई। लेकिन उस साधुवेषधारी के पाप अभी कम नहीं हुए थे, सुनते हैं उसने गिरफ्तारी से बचने की भरसक कोशिश की, और लगातार पूरे देश में भागता रहा, ताकि सत्ता उसे संरक्षण दे सके। जब उसकी कहीं पेश ना चली तो उसे आखिरकार गिरफ्तार कर लिया गया, गिरफ्तार होते समय भी वो पुलिस अफसर को अपने रसूख की धमकी देता रहा, अंत तक वो अपने अंधभक्तों से गुहार लगाता रहा कि वो पुलिस को अपना काम न करने दें, और उसे छुड़ा लें। 

सुनते तो ये भी हैं कि इस साधुवेशधारी के भय का साम्राज्य इतना विशाल है कि उसे गिरफ्तार करने के बाद, उसे सज़ा हो जाने के बाद भी आज तक उन पुलिस वालों को, गौर कीजिएगा, पुलिसवालों को विशेष सुरक्षा मुहैया करवाई गई है ताकि उनका हश्र भी उन गवाहों जैसा ना हो जाए, जिनकी हत्या करवा दी गई है। ये साधुवेशधारी मुकद्में में गया तो गवाहों के बयानात और पीड़िता की निशानदेही पर अंततः उसे सज़ा तो मिली, लेकिन साथ ही उसके समर्थन में पूरी अंधभक्त बिरादरी लग गई, पूरी व्यवस्था उसके बचाव में उतर आई, सारी सत्ता ने एड़ी-चोटी का जोर लगाया कि उसे किसी तरह जेल से बाहर निकाला जाए। 

आखिरकार इसका भी इंतजाम किया गया। उस साधुवेशधारी को उसके स्वास्थय का हवाला देकर छः महीने की ज़मानत पर छोड़ दिया गया। वही व्यवस्था जिसने एक 90 प्रतिशत अशक्त व्यक्ति को ज़मानत पर नहीं छोड़ा था, एक बूढ़े व्यक्ति को, एक अशक्त व्यक्ति को पानी पीने के लिए स्टा तक नहीं दी थी, उसी व्यवस्थ ने इस साधुवेशधारी के मामले में दयालुता दिखाते हुए इसे, एक नहीं, दो नहीं, बल्कि छः महीने के लिए स्वास्थयलाभ करने के लिए ज़मानत दे दी। अब मुसीबत उन गवाहों की है, जिन्हें कोई सुरक्षा नहीं है, जो कभी भी मारे जा सकते हैं। अब मुसीबत उन पुलिसवालों की है, जिन्होने इस साधुवेशधारी को पकड़ा, उसे सज़ा दिलवाने में मदद की। 
लेकिन मामला तो इससे भी ज्यादा संगीन है। यदि आपके घर कोई बलात्कारी आएगा, तो आप उसका स्वागत कैसे करेंगे? ज़रा सोच कर देखिए। क्या आप उसका स्वागत करेंगे? क्या आप उसकी आरती उतारेंगे? क्या आप उसकी पूजा करेंगे? क्या आप उसे पूज्यनीय मानंेगे? जी नहीं। आप पूरी कोशिश करेंगे कि वो वहशी आपके परिवार के क़रीब तक ना फटके, आप कोशिश करेंगे कि आपके घर की, आप के समाज की बहु-बेटी, महिलाएं सुरक्षित रहें, और उसके चंगुल से बच सकें। 

लेकिन अफसोस की जब वो ज़मानत पर छूटा तो उसका भव्य स्वागत किया गया। देश की सनातन, पवित्रता को हज़ारों अंधभक्तों ने अपने कदमों तले रौंद दिया। उस साधुवेशधारी के इस आयोजन से किसी को कोई तकलीफ नहीं हुई, वही व्यवस्था तो डेढ़ सौ मजदूरों को प्रदर्शन से रोकने के लिए लाठीचार्ज कर देती है, उसने इस आयोजन को होने दिया। आस्था के नाम पर बलात्कारी का भव्य स्वागत किया गया। और पीड़ित लड़कियां इस आयोजन को बेबस देखती रहीं। 

मैं एक बार फिर कहना चाहता हूं कि मेरी इस कहानी से अगर आपको किसी के साथ साम्यता दिखाई देती है तो आपकी अपनी कल्पनाशक्ति का कमाल है। 

मैं खुद इस मामले में इतना ही कहना चाहता हूं कि 

एक और पाप देखना था इस जमीं को अभी
बच्चियों की अस्मत से नहीं कोई सरोकार इन्हे
कहां तो होना था, बच्चियों को बेखौफ आज़ाद
कहां डर की चादर ओढ़े बैठी हैं बच्चियां यहां 

सुना था दुनिया तरक्की की ओर जा रही है, यहां तो अभी तक खौफ के साये से निकल न पाई है आधी आबादी। अब इस आधी आबादी की जिम्मेदारी है किसकी, किस पर एतबार करें, कौन बनेगा पासबां इनका। यही सोच के हाथ कांपते हैं, दिल लरज़ता है। नमस्कार।

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