सोमवार, 22 दिसंबर 2025

महामानव वर्सेज़ राहुल




नमस्कार, मैं कपिल एक बार फिर आपके सामने। दोस्तों, बहुत दिनों से एक सवाल फिजाओं में गूंज रहा है, गूंज नहीं रहा तो कम से कम फुसफुसा तो रहा है। ये सवाल दरअसल भक्तों ने ही शुरु किया था, शुरुआती दिन थे, और उस समय बहुत सारे भक्तों ने अपनी असली पहचान उजागर नहीं की थी। तब बार -बार एक ही सवाल सामने आता था, महामानव नही ंतो कौन? इस कौन का जवाब नहीं था। नहीं था का मतलब कुछ लोगों ने भरसक तर्क की मदद से इसका जवाब देने की कोशिश की थी, लेकिन किसी को तर्क ही मानना होता तो लोकतंत्र में ये सवाल ही पैदा नहीं होता। लेकिन पिछले कुछ पांच-सात सालों में, लोकसभा के नेता विपक्ष ने कुछ अपने व्यक्तित्व को कुछ ऐसा उभारा है, ऐसा राजनीतिक वातावरण तैयार किया है कि खुद महामानव भी थोड़ा परेशान से दिखने लगे हैं, और एक बार फिर से राहुल गांधी की जगह उनके नाना, यानी जवाहरलाल नेहरु को निशाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं। 


तो आज फैसला हो ही जाए कि महामानव वर्सेज लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के बीच अगर मुकाबला हो तो कौन कितना कैसा और कहां बैठेगा। महामानव ने राष्टीय पटल पर आते ही ऐसे-ऐसे काम किए हैं कि जिनके मुकाबले इस दुनिया में तो किसी और व्यक्ति का उस लेवल पर आ पाना मुश्किल है। लेकिन हम यूं ही हवा में बात नहीं करेंगे बल्कि एक-एक करके हर बात में तुलना की जाएगी और आपके सामने रखा जाएगा असली यानी वास्तविक तथ्य।


तो सबसे पहले आते हैं शिक्षा पर। महामानव की दोनो डिग्रियां यानी बी ए और एम ए की डिग्रियां डिप्टी महामानव ने एक प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान जनता के सामने रखी थीं। हालांकि इस शानदार प्रेस कांफ्रेंस के बाद भी उन डिग्रियों पर विवाद रहा, लेकिन इस विवाद से कोई फर्क नहीं पड़ता। इधर राहुल गांधी की कोई डिग्री कभी सार्वजनिक ना की गई, और मेरी जानकारी में अब तक उन पर कोई विवाद भी ना हुआ। लेकिन ये तो आपको मानना पड़ेगा कि जहां महामानव की डिग्री डीयू यानी दिल्ली यूनिवर्सिटी की है, वहीं राहुल गांधी सुना है विदेशों में पढ़े हैं, कैम्ब्रिज से उन्होने एम फिल किया है। तो इस तरह देखा जाए मितरों तो जहां महामावन सिर्फ एम ए की डिग्री पर रुक गए, हालांकि वो चाहते तो पी एच डी की डिग्री भी ले सकते थे, उन्हें कौन रोक सकता था, लेकिन उन्होने एम ए पर ही संतोष कर लिया। तो खैर इस मामले में राहुल गांधी उनसे बाजी मार ले गए। अब जो हो गया वो हो गया, हम आगे चलते हैं। 

आपको याद होगा मितरों की महामानव ने अपनी फिटनेस और चुस्ती-फुर्ती के बारे में कई बातें की हैं। वो दिन के चौबीस में से चालीस घंटे काम करते हैं, वो योगा करते हैं। लेकिन पिछले कुछ समय से राहुल गांधी के फिटनेस के वीडियो देखे जा रहे हैं, जो बहुत वायरल भी हो रहे हैं, राहुल गांधी जहां मर्जी दौड़ पड़ते हैं, पानी में कूद जाते हैं, और भी जाने क्या क्या करते हैं। अब ऐसे में फिटनेस के तौर पर भी राहुल गांधी महामानव से बीस ही पड़ते हैं। हालांकि महामानव की छाती का नाप छप्पन इंच है, जिसका जिक्र खुद महामानव ने ही किया है, और राहुल गांधी की छाती का नाप हमें नहीं पता है, लेकिन फिटनेस के मामले में तो राहुल गांधी ने महामानव से बाजी मार ही ली है। पर भी और बहुत सारे क्राइटेरिया हैं जिन पर हम बात कर सकते हैं। 






महामानव को बच्चों से बहुत प्यार है। ये प्यार वो लगातार दिखाते रहते हैं। इस मामले में तो वो एक नंबर हैं, परीक्षा पर चर्चा करते हैं, और बच्चों को ये बताते हैं कि परीक्षा कैसे दी जाएं, हालांकि उन्होने खुद गांव छोड़ने के बाद स्कूल का मुहं नहीं देखा लेकिन बच्चों को अक्सर वे बताते पाए गए हैं कि परीक्षा कैसे दी जाए।



लेकिन राहुल गांधी यहां भी महामानव से बाजी मार ले गए। बच्चों के साथ एक सहज व्यवहार बना लेने में राहुल गांधी महामानव से आगे ही लगते हैं। 



पिछले दस से ज्यादा सालों से महामानव ने बहुत प्रयास किया कि उनकी छवि ऐसी बने कि वो बच्चों के बीच लोकप्रिय हैं, और बच्चे उन्हें चाहते हैं, लेकिन बहुत प्रयास करने के बाद भी उन्हें इसमें बहुत सफलता नहीं मिली। जबकि बच्चों के साथ राहुल गांधी के जितने भी वीडियो दिखाई देते हैं, उनमें ये बात साफ पता चलती है कि बच्चे उन्हें बहुत पसंद करते हैं, और वो बच्चों के साथ सहज होते हैं। अब इसके कारण कोई भी हों, और आप इसमें कोई भी और कैसा भी कयास लगाएं, लेकिन बात तो यही है बच्चों के साथ राहुल गांधी के नंबर महामानव से ज्यादा हैं। अब हैं तो हैं, क्या किया जा सकता है। लेकिन रुकिए अभी हमारे पास बहुत सारा मसाला है।

कहा जाता है कि महामानव ऑरेटर बहुत बढ़िया हैं, यानी कि वक्ता बहुत अच्छे हैं, बढ़िया भाषण देते हैं, और महामानव के समर्थक और उनके विरोधी भी ये तो मानते ही हैं कि भाषणबाजी में महामानव का जवाब नहीं, जब वो भाषण देते हैं, तो कब उत्तर-उत्तर, दक्षिण-दक्षिण निकल जाते हैं कि खुद उनको भी पता नहीं चलता। इस मामले मे ंतो आपको मानना पड़ेगा कि तुलना की जाए तो महामानव का पलड़ा ही भारी पड़ेगा। 
भीड़ के सामने भाषण देते महामानव के कुछ फोटो
लेकिन अफसोस कि यहां भी महामानव ने अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारी हुई है, यानी घपला किया हुआ है। ये जो टेकनिकल टीम है महामानव की ये सबकुछ गड़बड़ कर देती है। कई बार तो यूं हुआ कि भाषण देने के बीच में ही महामानव का टेलीप्रॉमप्टर बंद हो गया, और इधर टेलीप्रॉमप्टर बंद हुआ उधर महामानव की सिट्टी-पिट्टी गुम, बहुत ही भद्द पिटी। 

तब पता चला कि ये भाषण देने की कला असल में टेलीप्रॉमप्टर का कमाल है, उपर से अपनी भाषण बाजी में ही महामानव इतने घपले कर चुके हैं कि हम चादर डालना भी चाहें तो वो घपले छुपते नहीं हैं। 


इधर राहुल गांधी के नाम पर जो घपले दरअसल दिखाए जाते हैं, उनकी पोल खुल जाती है, और राहुल गांधी अपने भाषणों में महामानव की धुर्री छिड़ा देते हैं। अभी तक तो राहुल गांधी के भाषणों में हमें कोई घपला दिखाई दिया नहीं, बल्कि वोटचोरी वाले अभियान में तो उनके भाषणों का बड़ा ही चर्चा चला। 

तो ऐसे में भाषणबाजी वाले मामले में भी महामानव राहुल गांधी से नीचे ही निकलते हैं। अब कर ही क्या सकते हैं। 

मुझे लगता है कि अब भी एक फील्ड तो ऐसा बचता है कि जिसमें महामानव राहुल गांधी से बाज़ी मार सकते हैं। 

महामानव ने देश में भाषण दे देकर, भाषणों को एक नई उंचाई दी है, इन भाषणों से पी एम के पद की गरिमा में भी जर्बदस्त उछाल आया है। ये जो महामानव की सड़कछाप भाषा उनके भाषणों में दिखाई देती है, मेरी गारंटी है कि राहुल गांधी अभी एक जनम और ल ेले, तो इस कला में वो महामानव की बराबरी नहीं कर सकता। राहुल गांधी अपने भाषणों में गाली नहीं देता, किसी का अपमान नहीं करता, और ना ही वो पर्सनल अटैक करता है। बस यही राहुल गांधी की कमजोरी है साहब, और मुझे लगता है कि महामानव को यहीं चोट करनी चाहिए। महामानव अपने भाषणों का स्तर और उंचा कर दें, अपने भाषणों को गालियों से, पर्सनल अटैक से सजाएं, उसे और सड़कछाप बना दें। वो ऐसा कर सकते हैं, उनमें ये क्षमता है। राहुल गांधी में वो क्षमता नहीं है, वो अपने भाषणों को ऐसा नहीं बना पाएंगे, और इस मामलें मे महामानव जो राहुल गांधी से कई दर्जे उपर चल रहे हैं, वो और उपर होते जाएंगे। 

मुझे यकीन है मितरों कि मेरी इस बात पर कोई महामानव का ध्यान दिलाएगा और आने वाले दिनों में हमें महामानव के कुछ ऐसे ही कतई गलघुच्चन भाषण सुनने को मिलेंगे। 

चचा जो थे हमारे, ग़ालिब, उन्होने कहा था

तू करता जा जो करना है, दुनिया की ऐसी की तैसी
कर बंटाधार इस दुनिया का, दुनिया की ऐसी की तैसी

हालांकि सुनने में ये शेर ग़ालिब का नहीं लगता, लेकिन आप तो इसे ग़ालिब का ही मानिए, वैसे भी क्या फर्क पड़ता है,। 

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