शुक्रवार, 16 जनवरी 2026

महामानव की जादूई नज़रें

देखिए, नईं आप ज़रा देखिए ये विपक्षियों के डरामे को। महमानव चाहते हैं कि सरकार हर वक्त आपकी हथेलियों में रहे, इकतरफा रहे, लेकिन रहे, और ये विपक्षी मोहतरमा इसे स्नूपिंग एप बता रही हैं।
महामानव चाहते हैं कि वो हर वक्त, हर क्षण, हर घड़ी आपके साथ रहें, आपके फोन में रहें, और ये विपक्षी, ये कांगी, ये वामी चाहते हैं कि ऐसा ना हो, बताइए ये कोई बात हुई भला। जब महामानव खुद को अवतार घोषित कर चुके हैं। तो वे चौथाई या उससे ज्यादा ईश्वर तो हो ही चुके हैं। अब ईश्वर तो जनाब सर्वव्यापी होता है, सर्वज्ञानी और अंर्तयामी होता है। जैसे महामानव ईश्वर हुए हैं, वैसे ही वो सर्वज्ञानी और अंर्तयामी होना चाहते हैं, तो इन्हें इसमें भी प्रॉब्लम है। अरे इस देश में कोई है जो इस घोर कलियुग में महामानव से ईश्वर होने की जुगत लगा रहा है और ये दिलजले हैं कि इन्हें चैन नहीं पड़ता। संचार एप के ज़रिए महामानव चाहते हैं कि सरकार को आपकी इच्छाओं का, आपकी आकाक्षांओं का पता रहे, आप किससे बात कर रहे हैं, क्या बातें कर रहे हैं, क्या आपको कोई शिकायत तो नहीं है?, क्या आपकी कोई दबी, ढंकी, छुपी इच्छा तो नहीं है? महामानव को सबकुछ पता होना चाहिए। ताकि समय रहते आपको ठीक किया जा सके.....मेरा मतलब, मेरा कहने का मतलब है कि समय रहते आपकी इच्छाएं पूरी की जा सकें। आज के दौर में दोस्तों जब महामानव ईश्वर होने में पूरी ताकत लगा रहे हैं, ये विपक्षी महामानव की इत्ती सी इच्छा पूरी नहीं होने दे रहे।
ये सब आपको झूठ बता रहे हैं, अरे भई हर वक्त आप सरकार की नज़र में रहेंगे तो आपका ही तो फायदा है, आप कितना पैसा कमा रहे हैं, कितना टैक्स चुरा रहे हैं, किससे क्या बातें कर रहे हैं, ये सब तो सरकार को पता होना चाहिए। देखो यार अगर तुम ठीक हो, महामानव से खुश हो, यानी उनके बारे मे सब भला-भला बोल रहे हो, सोच रहे हो, तो सब ठीक ही ठीक है। तो तुम्हे डरने की ज़रूरत ही क्या है? डरे वो जो महामानव की आलोचना करता हो, सरकार की आलोचना करता हो, ऐसा करने वाले को तो वैसे भी जेल भेज देने की ज़रूरत है। अभी हो क्या रहा है कि लोग महामानव की आलोचना कर रहे हैं, बेकार मे ंकर रहे हैं, लेकिन कर रहे हैं। यार ये तो वैसे भी ठीक बात नहीं है कि देश मे महामानव की आलोचना की जाए। पर ज़रा सोचिए, अगर ये संचार एप आपके फोन में आ जाएगा, तो चुनाव आयोग को ये एस आई आर करने की ज़रूरत नहीं होगी, महामानव को पहले ही पता होगा कि कौन किसे वोट कर रहा है, बस इत्ती सी बात है। आप महामानव की आलोचना करने से बचेंगे, और सरकार को पहले से ही पता चल जाएगा कि कौन, किसकी, कहां, कब, कैसे आलोचना करना चाहता है। लोकचंद्र को बचाने के लिए साथियों, संचार एप जरूरी है। ये जो संचार एप का विरोध कर रहे हैं, ये लोकचंद्र के दुश्मन हैं, महामानव और उनकी टीम जो सभी मोबाइलों में संचार एप डालना चाहती है, वो लोकचंद्र को बचाना चाहती है। देखिए अभी क्या होता है कि कोई ज़रा कोई नारा लगाता है, या कहीं भाषण देता है, या कोई फेसबुक पोस्ट करता है, तब जाकर पुलिस हरक़त में आती है। लेकिन अगर संचार एप आ गया तो नारा लगाने से पहले ही पुलिस यानी सरकार आपको अरेस्ट कर लेगी, और फिर आपके नक्सली लिंक का पता लगाएगी। आपने ज़रा सरकार की आलोचना के बारे में सोचा तो पुलिस फौरन आपको अरेस्ट कर लेगी और फिर आपके नक्सली लिंक का पता लगाएगी, आपने फेसबुक पर या ट्विटर पर कुछ लिखने की सोचा, या शेयर करने की सोचा तो पुलिस फौरन आपको अरेस्ट कर लेगी और फिर आपके नक्सली लिंक का पता लगाएगी। जरा सोच के देखिए, आपके पास एक मोटरसाइकिल है, और आप अपने दोस्त से कह रहे हैं कि आप सिर्फ दो सौ रुपये का पैटोल डलवाने की सोच रहे हैं, क्योंकि पैटोल बहुत महंगा है। अब जब अपने दोस्त से ये बात कर रहे होंगे तो आपका फोन आपकी जेब में होगा, जिसमें संचार एप होगा, जिसके ज़रिए आपकी ये बात पुलिस के कानो तक पहुंचेगी। बस पुलिस फौरन आपको अरेस्ट कर लेगी, क्योंकि पैटोल की कीमतों के बारे में बात करना तो सरकार की आलोचना करना है, और सरकार की आलोचना करना तो नक्सल होना है। बस हो गए आप अर्बन नक्सल। कित्ती सीधी सी बात है। अब ज़रा सोचिए, देश की सीमा पर सैनिक लोग अपना सब कुछ निछावर करने को तैयार खड़े हैं, और आप हैं कि आपको अपनी निजता की पड़ी है, अपनी आज़ादी की पड़ी है। अरे ये मत सोचो की महामानव ने आपके लिए क्या किया, आप तो ये सोचो कि आपने महामानव के लिए क्या किया? आप ये नहीं सोचते कि संचार एप से आपकी निजता जाएगी, लेकिन महामानव की अमरता तो बनेगी। अब आप ही बताइए, आपकी दो टके की निजता के मुकाबले महामानव की अनश्वरता, उनके ईश्वर होने का दावा, ज़रूरी है या नहीं। चचा जो थे हमारे, ग़ालिब, निजता के यानी प्राइवेसी के वो बिल्कुल खिलाफ थे, प्राइवेसी के नाम से तो उन्हें कतई चिढ़ मची हुई थी, इसलिए संचार एप के लिए उन्होने एक शानदार शेर लिखा था। हर पल मेरे हर हाल पे नज़र रखें सरकार आपमें मुझे तो खुदा दिखें संचार एप डाल के मेरे मोबाइल में वो कह रहे हैं लोकचंद्र है ये चखें आलोचना नहीं होगी तो लोकचंद्र बरबाद हो जाएगा चचा भी यही मानते थे, लोकचंद्र के वो कतई खिलाफ थे, कहते थे अमां मोबाइल में डालो संचार एप और प्राइवेसी को प्राइवेटाइजेशन की जेब में डाल दो, सारे झगड़े-टंटे मिट जांगे। बस उसी पर चलाओ लोकचंद्र की सवारी, जब तक चलती हैं और फिर हंस देते थे। ये तो खैर चचा की बात है, कहां तक करेंगे। आप तो मोबाइल पे संचार एप डाल कर मजे लो तरकारी के ।हम चले, फिर मिलेंगे अगर संचार एप ना डला तो।

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