ये कौन लोग हैं जो शोर मचा रहे हैं, एक शानदार सनातनी सरकार की मुखिया के लिए ”हाय-हाय” के नारे लगा रहे हैं।
जनाब दिल्ली की कमान हाथ में लेते ही हिंदू धर्म की रक्षा की जिम्मेदारी का गठ्ठर अपने सिर पर रखने वाली रेखा जी गुप्ता से आप लोग इतना चिढ़ते क्यों हैं। दिल्ली में क्या पहले प्रदूषण नहीं था, क्या पहले हवा खराब नहीं थी, क्या पहले सांस लेना दूभर नहीं था? जब पूरी दुनिया में दिल्ली सबसे प्रदूषित शहर की कैटेगरी में आ गया था तो उस समय रेखा जी गुप्ता की सरकार ने आपको दिवाली पर पटाखे जलाने की अनुमति दिलवाई थी। आप भूल जाएं, लेकिन धर्म उन्हें नहीं भूलेगा, पटाखे जलाकर दिल्ली की जनता को धर्म का असली मर्म रेख जी गुप्ता ने सिखलाया था, ये बात आप भले ही भूल जाएं लेकिन मनिंनदरजीत सिंह जी कभी नहीं भूलेंगे। और आप ऐसे अहसान फरामोश हैं कि स्टेडियम में खडे़ होकर ए क्यू आई का नारा लगा रहे हैं।
ये दरअसल देशद्रोहियों की, आपियों की, वामियों की, कांगियों की, साजिश है, जिन्होने इस खराब हवा के मुद्दे को इतना बढ़ा-चढ़ा कर दुनिया के सामने रखने की हिमाकत की है। क्या है ये ए क्यू आई जिसे आप इतना बड़ा मुद्दा बना दे रहे हो? क्या ये धर्म से बड़ा है? सनातन से बड़ा है?
जनाब दिल्ली की कमान हाथ में लेते ही हिंदू धर्म की रक्षा की जिम्मेदारी का गठ्ठर अपने सिर पर रखने वाली रेखा जी गुप्ता से आप लोग इतना चिढ़ते क्यों हैं। दिल्ली में क्या पहले प्रदूषण नहीं था, क्या पहले हवा खराब नहीं थी, क्या पहले सांस लेना दूभर नहीं था? जब पूरी दुनिया में दिल्ली सबसे प्रदूषित शहर की कैटेगरी में आ गया था तो उस समय रेखा जी गुप्ता की सरकार ने आपको दिवाली पर पटाखे जलाने की अनुमति दिलवाई थी। आप भूल जाएं, लेकिन धर्म उन्हें नहीं भूलेगा, पटाखे जलाकर दिल्ली की जनता को धर्म का असली मर्म रेख जी गुप्ता ने सिखलाया था, ये बात आप भले ही भूल जाएं लेकिन मनिंनदरजीत सिंह जी कभी नहीं भूलेंगे। और आप ऐसे अहसान फरामोश हैं कि स्टेडियम में खडे़ होकर ए क्यू आई का नारा लगा रहे हैं।
ये दरअसल देशद्रोहियों की, आपियों की, वामियों की, कांगियों की, साजिश है, जिन्होने इस खराब हवा के मुद्दे को इतना बढ़ा-चढ़ा कर दुनिया के सामने रखने की हिमाकत की है। क्या है ये ए क्यू आई जिसे आप इतना बड़ा मुद्दा बना दे रहे हो? क्या ये धर्म से बड़ा है? सनातन से बड़ा है?
ये इस देश की विडंबना है कि वो एक कर्मठ प्रधानमंत्री को, एक कर्मठ मुख्यमंत्री को पहचान नहीं पा रहा है।
ये तो पाश्चात्य संस्कृति की साजिश है। ये ए क्यू आई कोई संस्कृत का शब्द नहीं है, ये तो हमारी संस्कृति में भी नहीं है, ये तो विदेशी मुल्कों की साजिश है जिसके ज़रिए वो इस देश को बदनाम करना चाहते हैं, और इसमें कुछ लोग जो इस देश में रहते हैं, इस देश का खाते हैं, लेकिन बाहरी मुल्कों की मदद करते हैं, वो इनका साथ दे रहे हैं। सच बात तो ये है कि रेखा जी गुप्ता जी ने ठीक ही कहा है कि ये ए क्यू आई तो सिर्फ एक टेम्परेचर है, तापमान है जिसे किसी भी इन्स्टूमेंट से पता किया जा सकता है। इसलिए जब आप थर्मामीटर इस्तेमाल करेंगे तो आपको पता चलेगा कि ए क्यू आई जो है वो 106 से उपर जाएगा ही नहीं। अब बताइए, 106 ए क्यू आई क्या गलत होगा, बल्कि अगर आपको मेरी बात का यकीन नहीं है तो अभी की अभी थर्मामीटर निकालिए और देखिए आपको दिल्ली का ए क्यू आई 21 डिग्री से ज्यादा नहीं दिखेगा, बल्कि रात मे ंतो ये 2 से 3 डिग्री तक गिर जाता है। ये विदेशी साजिश है जिसमें दिल्ली के टेम्परेचर को ए क्यू आई से अलग कर दिया गया है, इसलिए हम मांग करते हैं कि देश में यानी भारत में ए क्यू आई नापने के लिए थर्मामीटर का इस्तेमाल किया जाए।
सभी ए क्यू आई नापने वाले केन्द्रों पर थर्मामीटर लगाया जाए, जिनसे ए क्यू आई नापा जाए। ये पूरी दुनिया भारत का विकास देख कर जल रही है। अरविंद केजरीवाल की सरकार जो काम नही ंकर पाई हम वो काम करके दिखाएंगे, हम पूरी दुनिया से अलग, भारत में, खासतौर पर दिल्ली में ए क्यू आई नापने की अलग तदबीर विकसित करेंगे जिसमें हाल कैसा भी हो, ए क्यू आई कम ही दिखाया जाएगा।
ए क्यू आई ही क्यों, हम बेरोज़गारी नापने के भी नये पैमाने बनाएंगे, जिससे देश में बढ़ती बेरोजगारी पर लगाम लगाई जा सके। इसी तरह पिछले दिनों जो रुपया नीचे गिर रहा है, उससे निपटने के लिए हम रुपये की क़ीमत आंकने के लिए भी नये पैमाने बना देंगे ताकि रुपया नीचे गिरता ना लगे, इसी तरह जब लोग कहते हैं कि हमारे देश में भ्रष्टाचार बढ़ रहा है, अपराध बढ़ रहा है, नफरत और दंगे बढ़ रहे हैं, हम उन सब पैमानों को भी बदल देंगे ताकि सब अपराध कम होता हुआ लगे और हम अपनी छप्पन इंची छाती को ठोक कर कह सके कि, अच्छे दिन आ गए। बल्कि हम अच्छे दिन की परिभाषा ही बदल देंगे ताकि बुरे दिनों को अच्छे दिन बताया जा सके।
ये वो लोग हैं दोस्तों जिन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही है, प्रदूषित हवा की वजह से जिनकी जान पर बन आई है। ये लोग वो लोग हैं, जिन्हें रेखा जी गुप्ता जी का सम्मान अपनी जान से बढ़ कर लगता है, ये लोग अपनी जान बचाने को दिल्ली छोड़ कर भाग रहे हैं। लगातार दिल्ली वाले प्रदूषण के लिए जो रेखा जी गुप्ता को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, उसके चलते उन्होने एक क्रांतिकारी, ऐतिहासिक फैसला लिया है कि अब दिल्ली में ग्रिल और तंदूर को बैन कर दिया गया है। लेकिन सच तो ये है दोस्तों की सर्दियों में ये जो दिल्ली वाले अपनी रसोइयों में सुबह-सुबह पराठे बनाते हैं, उनसे बहुत धुआं उठता है, इस धुएं से सबसे ज्यादा प्रदूषण होता है। मैं तो रेखा जी गुप्ता से ये मांग करूंगा कि दिल्ली में पराठे बनाना, पराठे खाना बैन करना चाहिए, ताकि प्रदूषण का जो कलंक दिल्ली के माथे पर लगा है उससे छुटकारा मिले। दोस्तों, जो आपको ए क्यू आई की बात कहे, उससे कहिए कि ”जा पहले पराठे पर बैन लगा, फिर मुझसे ए क्यू आई की बात करियो”। दोस्तो, दिल्ली की हवा में प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण सर्दियों में घरों में बनने वाले पराठे हैं, जिन पर बैन लगना ही चाहिए, ताकि रेखा जी गुप्ता का आई क्यू बढ़ सके और दिल्ली का ए क्यू आई कम हो सके।
मेरे मितरों अब वक्त आ गया है कि हम दुनिया को बता दें कि हम विश्वगुरु हैं, आज ही से हम संकल्प लें। आपको याद होगा जब हमने ये शुरु किया था कि हमारे मंत्री हर तीसरे दिन कूड़े के ढे़र के पास जाकर कहते थे, ”भाई तुझे जाना होगा”, अब हमारे मंत्री प्रदूषण से कहेंगे कि तुझे जाना होगा भाई, पहले इन समस्याओं को मुख्यमंत्री रेखा जी गुप्ता के प्रोत्साहन से भेज कर हम बाकी अन्य समस्याओं के पास भी मंत्रियों को भेजेंगे, ताकि उन्हें भी रेखा जी गुप्ता का ये संदेश दिया जा सके और आखिरकार जब इन सनातनी मंत्रियों के इस सदंेश को सुन कर दिल्ली और अंततः ये देश समस्याओं से मुक्त हो जाएगा।
इसमें मुझे सिर्फ एक ही बात कहनी है, ज्यादातर मामलों में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा जी गुप्ता बहुत हद तक महामानव से भी आगे निकल गई हैं, अपने आउट ऑफ द वर्ल्ड विज़डम से उन्होने देश दुनिया को भौंचक्का कर दिया है, इतिहास, विज्ञान, स्पेस टेकनॉलॉजी, भाषा, सबके साथ उन्होने लगभग वही व्यवहार किया है, जैसा महामानव ने किया था। इस मामले में वो कतई महामानव जैसी हैं। लेकिन अपने मंत्रियों से दिल्ली के कूड़े को, भाई तुझे जाना पड़ेगा” जैसा संदेश देना महामानव को कतई नहीं सूझा, और इसलिए वो कतई, लेडी महामानव के लकब की हकदार हैं।
यूं मेरे दोस्तों हम दिल्ली के प्रदूषण को कम करने, कूड़े को कम करने, देश की बेरोज़गारी को कम करने की तरफ कदम बढ़ा सकते हैं।
चचा जो थे हमारे, ग़ालिब, वो कहते थे
जो आया था ये कह के, जमाना बदल दूंगा
वो कह रहा ह ैअब के, पैमाना बदल दूंगा
सीधा सा मंत्र है मितरों, जब काम ठीक ना हो, तो परिभाषा बदल दो, सारा खेल परिभाषा का है। आप काम करने की कोशिश ही मत करो, परिभाषाएं बदलते रहो, काफी है।
बाकी आप समझदार हैं, बस ये समझ लीजिए कि दिल्ली में प्रदूषण नहीं है, ये सब सरकार को बदनाम करने की साजिश है।
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