बुधवार, 25 फ़रवरी 2026

अरावली - कहां चली




नमस्कार, मैं कपिल एक बार फिर आपके सामने। लो भई, और कुछ नहीं मिला तो लगे ये प्रगतिशील शोर मचाने अरावली की पहाड़ियों के बारे में। महामानव ने एक नई सोच को जाग्रत करते हुए कहा कि भैया जो पहाड़ सौ मीटर या उससे नीचा होगा, यानी जिसकी उंचाई सौ मीटर तक नहीं पहुंचेगी उसे पहाड़ नहीं माना जाएगा। भई वाह, वाह भई वाह, क्या ही शानदार सोच है महामानव की। यानी जो सौ मीटर का नहीं है वो पहाड़ नहीं है। 




ये जो लोग शोर मचा रहे हैं कि अरावली खतम हो जाएगी, अरावली खतम हो जाएगी। वो महामानव के विज़न को नहीं देख पा रहे हैं। अरे तुम ग़रीब लोग, तुमने देखा ही क्या है। अगर हम दुनिया के नंबर वन देश बनना चाहते हैं, तो हमें कुछ सैक्रीफाइस तो करना ही पड़ेगा। ये सैक्रीफाइस ही है देश को दुनिया का नंबर वन देश बनाएगा, विश्वगुरु बनने के तिराहे पर तो हम खड़े ही हैं, अब हमें दुनिया का सबसे बढ़िया देश बनना है।

अब तुम देखोगे कि हम ये कैसे करें। इसके लिए हमें बहुत सारे बोल्ड कदम उठाने पड़ेंगे, बहुत सारे। तो सबसे पहले तो ये सोचो कि तुमने देखा होगा कि कैसे दुबई के, सउदी अरब के देश अमीर हैं, उनके यहां अमीर लोगों के पास तेल के भंडार हैं, तेल कहां से मिलता है, रेतीले रेगिस्तान से। रेत के रेगिस्तान में होती है, देश में रेगिस्तान बहुत कम है। इसलिए अरावली को हटाने की योजना है। अरावली को हटाने से रेगिस्तान फैल जाएगा, दूर-दूर तक रेगिस्तान फैल जाएगा। फिर सारी दुनिया के लोग रेगिस्तान के मज़े लेने के लिए हमारे देश में आया करेंगे। क्या ही कमाल होगा। आज जैसे मिडल ईस्ट के रेगिस्तान की वीडियो और फोटो हर जगह दिखाई देती हैं, वैसे दिल्ली की फोटो और वीडियो दिखेंगे। रेगिस्तान होने की वजह से सउदी अरब इतना इतराता है, अब महामानव की वजह से हम भी इतना ही इतराया करेंगे। हम उन्हें दिखा देंगे कि हम भी रेगिस्तान बना सकते हैं। 

दोस्तों इस रेगिस्तान के कितने फायदे हैं आप नहीं जानते। रेगिस्तान बनेगा तो क्या पता अपने यहां भी तेल के भंडार मिल जाएं। फिर उन तेल के कुआंे को अडानी, अम्बानी मैनेज करेंगे और हमारे आपके जैसे लोगों को नौकरियां मिलेंगी। फिर हमारे देश के लोगों को नौकरी के लिए सउदी अरब नहीं जाना पड़ेगा, बल्कि बाकी देशों के लोग हमारे देश में आकर नौकरी करेंगे। फिर देखना हमारा रुपया डॉलर से भी उपर हो जाएगा। अभी जो लोग रुपये की गिरावट पर शोर मचा रहे हैं, उन्हें तब पता चलेगा कि हमारा रुपया क्या कमाल दिखा सकता है। 

और तुम्हें क्या लग रहा है कि ये जो महामानव अरावली के पहाड़ों को काटेंगे तो उनका क्या करेंगे। अरे उनसे अपने देश में हम भी बुर्ज-खलीफा जैसी गगनचुंबी इमारते बनाएंगे। बुर्ज खलीफा 828 मीटर की है, तो हम 1000 मीटर उंची इमारत बनाएंगे और उसका नाम राम की लाट रखेंगे। राम की लाट बनाने के लिए दोस्तों अरावली का कटना जरूरी है, क्योंकि अरावली खतम होगी, तो ही रेगिस्तान फैलेगा, रेगिस्तान फैलेगा, तो हमें तेल मिलेगा, तेल मिलेगा तो पैसा आएगा, और तब उसी पैसे से हम राम की लाट जैसी बिल्डिंग बना पाएंगे। इसीलिए मुझे महामानव पसंद हैं उनकी सोच जो है, वो कोई आम सोच नहीं है, बल्कि दूरदृष्टि है, दूर भी नहीं, भैया उनकी बहुतदूरदृष्टि है। 

अरावली के खतम होने का दूसरा फायदा हमें ये होगा कि अभी दिल्ली में बहुत गर्मी पड़ती है, और बहुत ज्यादा सर्दी पड़ती है। दिल्ली के मौसम पर अरावली का, हिमालय का, और भी पहाड़ों का बहुत असर होता है, सभी जगह होता है। हम पहाड़ों के इस असर को खतम कर देंगे, दिल्ली में, और पूरे देश मे ंहम मौसम का एक ही तौर रखेंगे, गर्मी तो गर्मी, सर्दी तो सर्दी। अभी आप लोग दिल्ली में पानी की कमी से जूझ रहे हो, तब ऐसा नहीं होगा, होगा ये कि हिमालय में जो बर्फ पिघल रही है, वो पानी आपके पास आएगा, दूसरी तरफ रेगिस्तान के चलते, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और बहुत सारे उत्तर प्रदेश के खेत बंजर हो जाएंगे। इससे दिल्ली जो देश की राजधानी है उसमें भरपूर पानी होगा, इतना पानी होगा कि तुम्हें कभी पानी की कमी महसूस नहीं होगी। 


ये जो लोग अभी अरावली के खतम होने का मातम मना रहे हैं, आप उनकी तरफ मत देखो। ये वो लोग हैं तो कभी विकास को नहीं पहचान पाते, इन्हें हमेशा किसानों की, मजदूरों की, ग़रीबों की पड़ी रहती है। महामानव को देखो, उनकी तरह सोचना सीखो, ज़रा सोचो क्या महामानव ने कभी ग़रीबों के बारे मे ंसोचा है। अगर महामानव कभी किसानों, दलितों, आदिवासियों के बारे में सोचते, तो क्या कभी अडानी और अम्बानी दुनिया के सबसे अमीर लोगों की सूचि में अपनी जगह बना सकते थे। नहीं? इसलिए ग़रीबों के बारे में सोचना छोड़ो, तुम तो ये सोचो कि देश को अमीर कैसे बनया जा सकता है।

ये जो लोग अरावली को खतम नहीं करना चाहते वो देश को अमीर नहीं बनने देना चाहते, हमारे प्रिय एंकर अद्भुत मेघा से हमें बता रहे हैं कि ये जो दिल्ली का प्रदूषण है वो अरावली की वजह से ही है और अरावली खतम होने से वो प्रदूषण भी खतम हो जाएगा। अरावली खतम होने से समझिए क्या-क्या खतम हो जाएगा। ग़रीबी, प्रदूषण, बेचारगी, कमजोरी, घात, सुन्नापन, टेढ़ापन और अन्य विशेष बिमारियों का इलाज भी अरावली खतम होने से हो जाएगा। 


दरअसल, नेहरु ने जानबूझ कर दिल्ली को कटोरी से नहीं निकाला था, ये उनकी भूल थी, ग़लती थी, साजिश थी, लेकिन अब जबकि हमारे पास एक नॉनबॉयोलोजिकल महामानव है तो ये काम भी कर ही डाला जाए। पूरी अरावली खतम करने के लिए जिस तरह की हिम्मत और जिगरा चाहिए, वो नेहरु के पास नहीं था, महामानव के पास है, इसलिए इस काम को वही करेंगे। 

और एक विशेष बात पर चर्चा करना तो मैं भूल ही गया। देश की सुरक्षा। देश की सुरक्षा बहुत जरूरी है मितरों। और इस देश की सुरक्षा में सबसे बड़ी अड़चन ये अरावली ही तो है। अरावली होने के चलते, हमें दिल्ली से सीधा पाकिस्तान बॉर्डर नहीं दिखाई देता। एक बार अरावली खतम हो जाए तो हम दिल्ली में भी स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी जैसा ही एक और स्टैच्यू बनाएंगे, फिर उस स्टैच्यू की आंख से सीधे पाकिस्तान दिखाई देगा, और जैसे ही हम देखेंगे कि पाकिस्तान कोई ग़लत हरक़त कर रहा है, सीधे उस पर हमला कर दिया जाएगा। फिर हमें राडार से छुपने के लिए खराब मौसम या बादलों की जरूरत भी नहीं पड़ेगी, क्योंकि दुश्मन सीधे हमारी आंख की सीध में होगा। अभी क्या होता है ना, कि पहलगाम, या पुलवामा जैसा कायराना हमला पाकिस्तान कर ले जाता है, अब नही ंकर पाएगा। बढ़िया हो गया। 

तो कुल मिलाकर मामला सीधा बनता है साहब। वो लोग जो देश को दू......रदृष्टि से देख रहे हैं, वो तो कर रहे हैं अरावली को खतम करने की हिमायत, और जो भाई लोग इसे ग़लत बता रहे हैं, विनकी नज़र थोड़ा पास की है, यानी कमज़ोर है। अब ये जो मजदूर-किसान वगैरह हैं, वो कमज़ोर ही होते हैं, मै बताउं आपको, इनकी बात वैसे भी मानी नहीं जाती। महामानव ने डिसाइड कर लिया, सुप्रीम कोर्ट ने मुहर लगा दी, एन जी टी तीर्थ यात्रा पर है। 

तो जल्द ही मेरे दोस्तों, जब अरावली खतम हो जाएगी तो हम भी रेत के टीलों पर रात को बोनफायर में ग़रीबों और आदिवासियों का नाच देख सकेंगे, इसके सपने आप लेते रहें। 

बाकी, चचा जो थे हमारे, यानी ग़ालिब, उन्होने कलकत्ते और नखलउ पर शेर लिखे, दिल्ली पर उनके जानकार कहते हैं कि शेर ना लिखे ग़ालिब ने, लेकिन ऐसा वही कहते हैं, तो जानते नहीं थे, ग़ालिब को, या उतना क़रीब से नहीं जानते थे, जितना क़रीब से मैं उन्हें जानता था। तो अरावली पर एक शेर उन्होने लिखा था। वो कुछ यूं था शेर कि....

तेरे पहाड़ नीचे, मेरे पहाड़ उंचे
तेरी ज़मीं चुरा के, मैं आसमा बना लूं
तू रहेगा 100 के नीचे, मैं रहूंगा उसके उपर
तू कुछ भी कह ले भैया, मैं खत्म कर ये डालूं

ग़ालिब, ग़ालिब थे, कुछ भी कह सकते थे, आप ध्यान रखिए ज़रा, आजकल वैसे भी राष्टद्रोही होने की रवायत चली हुई है, कहीं आप ना हो जाना। 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

सेंगर को बेल

  नमस्कार, मैं कपिल एक बार फिर आपके सामने। सुना भई सेंगर जी को बेल मिल गई। पहले उन्हें आजीवन कारावास की सज़ा हुई थी, और ये सज़ा जो उन्हें मि...