नमस्कार, मैं कपिल एक बार फिर आपके सामने। सुना भई सेंगर जी को बेल मिल गई। पहले उन्हें आजीवन कारावास की सज़ा हुई थी, और ये सज़ा जो उन्हें मिली थी वो इसलिए थी कि उन पर बलात्कार और फिर पीड़िता के पूरे परिवार का सफाया करने के आरोप सिद्ध हुए थे।
कुछ लोग कह रहे हैं कि अगर हम कोर्ट के इस आदेश को स्वीकार करते हैं कि उसने सज़ा दी तो हमें कोर्ट के इस आदेश को भी स्वीकार करना चाहिए। मेरा तो ये कहना है जनाब कि माननीय सेंगर जी को दी गई सज़ा का विरोध करना चाहिए और ये स्वीकार करना चाहिए कि बेल उनका अधिकार था, बेल ही क्यों मेरा तो कहना है कि सिर्फ एक महिला के कहने पर, या मान लीजिए आरोप लगाने पर, जनता द्वारा चुने गए एक संसद सदस्य को यू ंसज़ा देना ही ग़लत है। पुलिस को इन महिलाओं को, जिन्होने माननीय सेंगर जी पर आरोप लगाया, और उनके समर्थन में जो आए उसे भी घसीट कर जेल में डाल देना चाहिए।
आसाराम को बेल मिली, रामरहीम को लगातार और जितनी वो चाहें बेल मिलती रहती है, तो फिर ये बताओ कि माननीय संेगर जी को बेल क्यों ना मिले। क्या तुमने उन्हें भी ये क्या कहते हैं, उमर खालिद, शारजील इमाम जैसा ही समझते हो क्या? अबे ये लोग कोई राष्ट विरोधी काम थोड़े ही कर रहे हैं कि इन्हें बेल नहीं दी जाएगी, ये कोई सोनम वांगचुक की तरह का काम थोड़े ही कर रहे हैं कि बिना कोई मुकद्मा चलाए इन्हें महीनों जेल में रखा जाएगा।
सेंगर, समझ रहे हो, कुलदीप सिंह सेंगर, अबे नाम ही काफी है। कोर्ट का कहना है कि माननीय संेगर जी के लिए जो कहा जा रहा है कि पुलिस और कानून के रक्षक उनके कहने पर कुछ ग़लत करेंगे तो कोर्ट ये नहीं मान सकता कि कानून के रखवाले, माननीय के कहने पर ऐसा कुछ करेंगे। बिल्कुल सही बात है, बताइए इसमें कुछ ग़लत हो तो? लड़की को एक साल लगा माननीय के खिलाफ शिकायत करने में, ये कोई बात हुई भला। कानून के रखवालों ने बहुत समझाया कि मान जा, मत अपनी जिंदगी खराब कर। हो गया सो हो गया समझ कर खैर मना। अपने घर जा। लेकिन ये लड़की बहुत ढीठ निकली। 2017 में घटना हुई, 2018 में जाकर उसके आरोप पत्र दायर हुए। फिर भी पुलिस वाले लगातार लड़की को, उसके रिश्तेदारों को बचाने में लगे रहे।
लेकिन लड़की और उसके परिवार वालों ने हद ही कर दी। उन्होने माननीय कुलटीप सिंह सेंगर पर आरोप लगाते हुए खुद अजय सिंह बिष्ट के पास एक लेटर भेज दिया। भई पुलिस ने कोशिश की कि लड़की का पिता ही बात को सही से समझ ले, इसलिए उसे समझाने के लिए, गौर कीजिएगा, समझाने-बुझाने के लिए, परिवार की इज्जत की बात थी, इसलिए संस्कारी पुलिस ने इसे भारतीय संस्कारों के अनुरूप समझा कि लड़की के बाप को समझाने-बुझाने के लिए थाने बुलाया। पर बाप कमजोर निकला और इस समझाने-बुझाने के दौर में ही उसने दम तोड़ दिया। ऐसे में पुलिस पर ये आरोप लगाना कि पुलिस ने माननीय कुलदीप सिंह सेंगर की हत्या कर दी, बहुत ही बचकाना बात है।
खैर, माननीय कुलदीप सिंह सेंगर फिर भी अपनी पर अड़े रहे, और इसके बाद उन्होने एक और कोशिश की, लड़की और उसके परिवार वालों को ये समझाने की, कि जो हो गया, उसे भूल जाएं और बेकार के इस विवाद को बंद करें। लेकिन लड़की एक वकील के झांसे में आ गई थी, जिसने शायद उसे ये बताया हो कि भारत का कानून निष्पक्ष होता है, और कानून सबके लिए बराबर होता है, और शायद ये भी समझाया हो कि कानून से उसे न्याय मिलेगा। अब लड़की नाबालिग थी, वकील की बातों में आ गई। फिर एक टक आया उसे ये समझाने की इस बेकार की अफरा-तफरी में कुछ नहीं रखा। लेकिन इस बार भी समझाने-बुझाने में उसकी दो मौसियां और खुद वकील साहब निपट गए।
सोचा था कि अब लड़की को समझ आ जाएगा कि बेकार माननीय कुलदीप सिंह सेंगर साहब पर व्यर्थ के आरोप लगाने का कोई फायदा नहीं है। लेकिन लडकी ना मानी। अब पुलिस ने तो अपना काम मुस्तैदी से किया, कोर्ट बिचारे के पास कोई रास्ता नहीं बचा था। उसे माननीय कुलदीप सिंह संेगर को सज़ा देनी पड़ी।
लेकिन बेजीपी के घर में देर हो सकती है, अंधेर नहीं। एक भाजपा एम एल ए को बलात्कार के आरोप मे ंसज़ा हो जाए, ये तो इस अभी 2014 में ताज़ा-ताज़ा आज़ाद हुए भारत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ये वो भारत है, जहां एक गर्भवती महिला का खुली सड़क पर गैंगरेप करने वालों की सज़ा ये कहकर माफ की जाती है कि वो खासे संस्कारी लोग हैं। जहां गुफा में बलात्कार करने और फिर लड़की के परिवार वालों की हत्या करने वाले, पिताजी, कहलाने वाले बाबा, राम-रहीम जेल से कम रिसॅार्ट में अपनी सज़ा काटते हैं, जहां बलात्कारी आसाराम के साथ खुद महामानव नाचते हैं।
ऐसे में माननीय कुलदीप सिंह सेंगर को, एक अदना लड़की से बलात्कार के लिए जेल मे ंतो नहीं रहने दिया जा सकता था। इसलिए आखिरकार संस्कार की जीत हुई, और अदालत ने एक तकनीकी पंेच निकाल ही लिया, जिसके तहत उन्हें अंततः बेल दी गई।
तो अंततः माननीय कुलदीप सिंह सेंगर को न्याय मिला, थोड़ा देर से मिला तो भी क्या हुआ। आखिर कोर्ट के इस फैसले से पुलिस वालों के हौसले बुलंद हुए। भाजपा के अन्य कुलदीपकों को ये संदेश गया कि आखिरकार उन्हें भी माननीय कुलदीप सिंह सेंगर की तरह, पहले पुलिस और अंततः अदालत साफ बचा ले जाएंगी। धन्य है भारतीय पुलिस, और न्यायालय, जिन्होने न्याय की इस लौ को बुझने नहीं दिया है। जब माननीय कुलदीप सिंह जी बाहर आएंगे तो फूलमालाओं से उनका स्वागत किया जाएगा, क्योंकि वो विजेता हैं।
दूसरी तरफ सेंगर को, पुलिस को, और न्यायालय को चुनौती देने वाली महिला और उनके समर्थकों को मौके पर ही उनके किए की सज़ा दे दी गई।
कुल मिलाकर बात ये है मितरों कि ये लोग कितना ही शोर मचा लें, बलात्कार जैसी छोटी-मोटी चीजों के लिए भाजपा के किसी संस्कारी कुलदीपक, जैसे कुलदीप सिंह संेगर को जेल में नही रखा जा सकता, नहीं रखा जाना चाहिए। बल्कि मैं तो कहता हूं कि कुलदीप सिंह सेंगर पर आरोप लगाने वाली लड़की को, कटघरे में खड़ा करना चाहिए। मेरे भक्त मितरों आपको फौरन अपनी यूज़ुअल ड्यूटी पर लग जाना चाहिए। यही मौका है कि हम महामानव के प्रति अपने प्रेम का प्रदर्शन करने का, यही मौका है खुद को संस्कारी साबित करने का, यही मौका है अपने धर्म के प्रति अपनी निष्ठा दिखाने का।
आज इन तथाकथित वामपंथियों की इतनी मजाल हो चुकी है कि, ये एक बलत्कृत लड़की को साथ लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं, इनका कोई भरोसा नहीं है, ये लोग इंडिया गेट पर, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने लगेंगे। याद रखिए दोस्तों, आसाराम हों कि प्रज्जवल रेवन्ना हों, हमारे महामानव ने हमेशा ही बलात्कारियों का समर्थन किया है।
अगर हमें महामानव की नज़रों में आना है तो हमें, भी ऐसा ही बनना पडे़गा। जहां तक संभव हो, महिला का मज़ाक उड़ाइए। उसकी पीड़ा पर हंसिए, यही हमें सिखाया गया है।
ये भारत की जनता को क्या हो गया है, जहां संस्कारों के लिए, परिवार की इज्जत के लिए, महिलाएं बलात्कार को रिपोर्ट तक नहीं करती थीं, अब वो उंचे पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ बलात्कार की रिपोर्ट लिखवा रही हैं। चाहे वो पूज्यनीय धार्मिक बाबा हों, या चुनाव जीत कर मंत्री बने हुए लोग हों, इन लड़कियों की हिम्मत कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है। पुलिस इनके परिवार के सदस्यों की हत्या कर देती है, इनके समर्थन में आने वाली लड़कियों को सोशल मीडिया पर टोल किया जाता है, लेकिन ये मा नही नहीं रही हैं। अब ये मौका आया है कि इनकी आवाज़ का खामोश कर दिया जाए। याद रखिए अगर उन्नाव पीड़िता को न्याय मिल गया, तो इनके हौसले बढ़ जाएंगे। कोर्ट ने हमें ये मौका दिया है कि ये दिखा दिया जाए कि कानून पीड़ित के पक्ष में हो तो भी कोई ना कोई तकनीकी कमी निकाल कर बलात्कारी को राहत दी जा सकती है। अब हमारा काम है कि इस लड़की को न्याय ना मिले, बाकी आपकी मर्जी।
ग़्ाालिब जो चचा कहलाते हैं, उन्होने इस मामले से खुद को दूर ही रखा है। लेकिन पूज्यनीय आसाराम जिन्हें बलात्कार के आरोप मे ंसज़ा झेलनी पड़ी, और बाद में उन्हें भी कोर्ट ने राहत दे ही दी, उनका कहना था।
अब आप कहेंगे, कपिल भाई, आसाराम क्यों? भई काफी रसिक रहे आसाराम, और अब तो जेल से बाहर हैं, आनंद कर रहे हैं, तो सोचा इस मामले में उनके विचार ज्यादा बेहतर लगेंगे। बाकी जल्द ही सभी बलात्कारी बाहर होंगे। जय हो भारत के कोर्ट और जजों की। नमस्कार।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें